‘Breathe Season 2’ Review: मनोवैज्ञानिक क्राइम थ्रिलर पर बनी वेब सीरीज Breathe आपकी सांस रोकने में उतनी कामयाब नहीं हो पाई

Breathe-Season

फाइनली Amazon Prime Video की सबसे मोस्ट अवेटेड वेब सीरीज ‘Breathe Season 2’ रिलीज हो गई है। ‘Breathe: Into the Shadows‘ का लोग पिछले 2 साल से इंतजार कर रहे थे। इस बार सीरीज में दो मुझी पात्र हैं जिसमें से एक बॉलीवुड के जाने माने अभिनेता Abhishek Bacchan और दूसरी मलयालम अभिनेत्री Nitya Menon है। निथ्य इस वेब शो के साथ अपना पहला डिजिटल डेब्यू कर रही हैं। इससे पहले उन्हें फिल्म ‘Mission Mangal’ में देखा गया था। Mayank Sharma फिर से शो का निर्देशक करते दिखाई देंगें। ‘Breathe’ का एपिसोड लगभग 40 मिनट लंबा है और इसमें कुल 5 एपिसोड हैं।

‘Breathe Season 2’ Review: आपने शो के ट्रेलर में देखा होगा कि शो की थीम एक बेटी और उसके पिता के प्यार को दर्शाया गया है। कहानी भी खुश ऐसी है। डॉ.अविनाश (Abhishek Bacchan) और आभा (Nitya Menon) की 6 वर्षीय बेटी-सिया का किसी ने अपहरण कर लिया है। उनकी बेटी को किशोर मधुमेह है और इसी कारण से उसे दिन में चार बार इंसुलिन इंजेक्शन की जरुरत पड़ती है। किडनैपिंग हुए लगभग 9 महीने हों चुके हैं। लेकिन अब तक किडनेपर का कोई पता नहीं चला है। लेकिन मामला तब गंभीर होता चला जाता है जब अपहरणकर्ता अजीब संदेश भेजना शुरू कर देता है। अपनी बच्ची को बचाने के लिए दोनों दंपति कुछ हत्याओं को अंजाम देते हैं। यहाँ अविनाश और आभा दोनों ही अपराध में समान रूप से भागीदार थे। हत्या की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के लिए भी गुप्त संदेशों का पता लगाने से लेकर ‘Breathe Season 2’ केवल एक आदमी पर आधरित शो नहीं है। 

इस सीजन में भी पिछले सीजन की तरह कबीर सावंत (अमित साध) एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। लेकिन इस बार आप उन्हें पिछली बार की तरह शराब की बोतल के साथ नहीं देख पाएंगें। इसके साथ ही वो मुंबई क्राइम ब्रांच से दिल्ली स्थानांतरित हो चुके हैं।

देखा जाए तो पहले सीजन के बाद जब किसी शो का दूसरा सीजन आता है तो रचनाकारों के लिए, दर्शकों को प्रभावित करना और भी बड़ी चुनौतीपूर्ण होता है। खासकर जब पिछले सीजन को दर्शकों द्वारा काफी सराहा गया हो। अगर हम इस बार ‘Breathe Season 2’ की बात करें, तो आपको पहले कुछ एपीसोड में पिछले सीजन के मुकाबले कमी नजर आएगी।

जो लोग इस शो से अगर ज्यादा उम्मीद लगाएं बैठे हैं तो उन्हें काफी हद तक निराशा हाथ लग सकती है। हाँ! अगर आपने पहला सीज़न नहीं देखा है, तो ये सीजन आपको काफी पसंद आएगा।

चलो हम अब आपको वेब सीरीज के कुछ परमुझ दृश्यों के बारे में बात करते हैं, जो आपको काफी हद तक प्रभवित कर सकते हैं जैसे कि ये जब दंपति को पता चला कि उनका बच्चा गायब है, तो उस समय वे जो भी महसूस कर रहे थे, उसे अधिक देखना पसंद करेंगे। यहां तक ​​कि प्रत्येक हत्या के बाद जो दोनों महसूस करते हैं उसे देखना और समझना बहुत अलग बात हैं। इससे ये समझ आता है कि एक माता पिता अपने बच्चों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

कुछ सीन में भावनात्मक पहलू ही केवल गायब नहीं था, बल्कि रहस्य की भी कमी थी। जब एक थ्रिलर रिलीज होती है तो दर्शक उम्मीद करते हैं कि उन्हें ऐसे दृश्य देखने को मिलेंगें जिसे देखकर वो दांतों तले ऊँगली दबा लेंगें। लेकिन हम कबीर सावंत के किरदार की बात करें तो वो मुख्य अभिनेता की तुलना में अधिक दिलचस्प था। किरदार की ऑन द स्पॉट थिंकिंग और मजाकिया अंदाज आपको सीरीज में मजा देगा। इस कहानी में एक अमित संध का किरदार ही इतना जबरदस्त है, जो इस सीजन की किस्ती को डूबने से बचाए रखता है।

कहानी किसी बिना स्टिक मोड़ के आगे बढ़ती है और शायद यही कारण है कि सीजन में जितनी भी हत्याएं होती हैं उनका आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है। लेकिन इसके पिछले सीजन का लेखन काफी बेहतर था और उसके मुख्य किरदार डैनी मैस्करेनहास (R.Madhawan) ने भी भी अपने काम से किरदार को जीवित किया था। 

कुल मिलाकर सीजन ठीकठाक है लेकिन इसका अंत काफी सवाल खड़े करता है:

आखिर Siya का अपहरण करने वाला कौन है? क्या Siya कभी अपने माता-पिता के पास वापस आएगी? उसके माता-पिता उसे बचाने के लिए कितनी दूर जाएंगे? क्या हत्याओं के बीच कोई संबंध है?

वैसे अगर आपके पास समय है और कुछ मनोविज्ञानिक थ्रिलर देखने का मन है तो तो सीजन इतना भी बुरा नहीं है। आप इसे देख सकते हैं।

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